अंदाज़-ऐ-जुदाई

रफाकतें कभी जंजीरे - पा नहीं होती

न चल सको,
तो बिछुड़ जाओ दोस्तों की तरह



फरिश्तों की दुआ


लाजिम तो नहीं कि जुबां इज़हार करे

कुछ जज्बों को अहसास भी हवा देते हैं

खामोश मोहबत भी इबादत होती है

ऐसी मोहबत को फ़रिश्ते भी दुआ देते हैं

अश्क

अश्कों से तर है फूल की हर एक पंखुड़ी


रोया है कौन थाम के दामन बहार का ....